गाजियाबाद में दो साल में 164 करोड़ की साइबर ठगी, रिकवरी सिर्फ 34.60 करोड़; फ्रॉड से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां


 गाजियाबाद में पिछले लगभग दो सालों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है। 625 मामलों में अपराधियों ने ₹164.08 करोड़ की ठगी की, जिसमें से पुलिस केवल ₹34.6 करोड़ (लगभग 21%) ही बरामद कर पाई। शेयर ट्रेडिंग और टेलीग्राम टास्क फ्रॉड प्रमुख हैं। पुलिस ने 311 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, लेकिन नागरिकों को ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

  1. जनवरी 2024 में शुरू किया गया था साइबर क्राइम थाना 

  2. पुलिस ने 311 आरोपितों को किया गिरफ्तार


  3. 625 मामले साइबर अपराध के दर्ज किए गए

  4. डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन निवेश के बढ़ते चलन के साथ गाजियाबाद में साइबर अपराध का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक एक जनवरी 2024 से अब तक यानी करीब दो साल में साइबर ठगी के कुल 625 मुकदमे दर्ज किए गए। जिनमें अपराधियों ने 164.08 करोड़ रुपये की सेंध लगाई।

  5. राहत की बात यह है कि पुलिस ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल अरेस्ट ट्रेसिंग और बैंकिंग सहयोग से 34.6 करोड़ रुपये की रिकवरी कर पीड़ितों को राहत दिलाई, लेकिन यह कुल ठगी की रकम का लगभग 21 प्रतिशत ही है।

    साइबर अपराध की श्रेणी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड की है। जिसमें 324 एफआईआर दर्ज हुईं और ठगी की रकम 114.70 करोड़ तक पहुंच गई। इसमें 27.05 करोड़ की रिकवरी हुई। दूसरे नंबर पर टेलीग्राम टास्क फ्राड है, जिसमें 129 केस दर्ज हुए और 20.34 करोड़ की ठगी हुई। डिजिटल अरेस्ट के 40 केस में 10.2 करोड़ की ठगी दर्ज की गई।

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